ग्रेच्युटी वह राशि है जो एक नियोक्ता अपने कर्मचारी को लंबी सेवा के पुरस्कार के रूप में देता है। Payment of Gratuity Act 1972 के तहत 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों में 5 साल की सेवा के बाद ग्रेच्युटी अनिवार्य है।
ग्रेच्युटी का फ़ॉर्मूला
Act के अंतर्गत (Covered): ग्रेच्युटी = (अंतिम मूल वेतन + DA) ÷ 26 × 15 × सेवा वर्ष
Act के बाहर (Not Covered): ग्रेच्युटी = (अंतिम मूल वेतन + DA) ÷ 30 × 15 × सेवा वर्ष
अंतिम मूल वेतन + DA: ₹50,000/माह | सेवा: 10 वर्ष 7 महीने (11 वर्ष माने जाएंगे)
ग्रेच्युटी = (50,000 ÷ 26) × 15 × 11 = ₹3,17,308
अगर ÷30 फ़ॉर्मूला हो: ₹2,75,000 — ₹42,308 कम!
5 साल की शर्त — एक महत्वपूर्ण नियम
ग्रेच्युटी के लिए 5 साल की निरंतर सेवा ज़रूरी है। लेकिन मद्रास हाईकोर्ट के अनुसार — अगर आपने 4 साल और 240 दिन (लगभग 4 साल 8 महीने) काम किया है, तो यह 5 साल माना जाता है। कई कंपनियां इसे नहीं मानतीं — लेकिन कानूनी रूप से आप ग्रेच्युटी के हकदार हैं।
आंशिक वर्ष की गणना
- 6 महीने से ज़्यादा: अगला पूरा साल माना जाता है
- 6 महीने से कम: वह वर्ष नहीं माना जाता
- उदाहरण: 10 साल 7 महीने = 11 साल | 10 साल 4 महीने = 10 साल
ग्रेच्युटी पर टैक्स — कितना देना होगा?
| कर्मचारी प्रकार | टैक्स-फ्री सीमा | उससे ऊपर |
|---|---|---|
| सरकारी कर्मचारी | 100% टैक्स-फ्री | कोई टैक्स नहीं |
| Private (Act के तहत) | ₹20 लाख तक | सामान्य टैक्स स्लैब |
| Private (Act के बाहर) | ₹20 लाख तक | सामान्य टैक्स स्लैब |
ग्रेच्युटी कब नहीं मिलती?
- 5 साल से पहले इस्तीफा देने पर (मृत्यु और अपंगता को छोड़कर)
- गंभीर अनुशासनहीनता या बर्खास्तगी पर
- जानबूझकर संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर